Donald Trump ने वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई के बाद ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को चुनौती दी और कहा कि उनकी शक्तियों को केवल एक ही व्यक्ति रोक सकता है और वो व्यक्ति ट्रंप खुद हैं। अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में, ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा इसलिए जाहिर कर रहा है क्योंकि यह द्वीप रणनीतिक, सैन्य और आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने जनवरी 2026 में कई बार कहा कि “हमें ग्रीनलैंड नेशनल सिक्योरिटी के लिए चाहिए” और डेनमार्क इसे ठीक से सुरक्षित नहीं रख पा रहा। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. सैन्य और रणनीतिक महत्व (National Security) ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में उत्तर अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है। यह अमेरिका और यूरोप के बीच सबसे छोटा रूट है, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिटेक्शन और डिफेंस के लिए क्रिटिकल है। 2. आर्कटिक में बर्फ पिघलने से नए शिपिंग रूट्स खुल रहे हैं, और रूस-चीन की बढ़ती मिलिट्री एक्टिविटी (जैसे रूसी सबमरीन्स, चीनी शिप्स) को काउंटर करने के लिए ग्रीनलैंड एक आइडियल आउटपोस्ट है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाजों की भरमार है। 3. खनिज संसाधन (Minerals and Resources) ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स (जैसे नीओडीमियम, डिस्प्रोसियम) की भारी मात्रा है, जो बैटरी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, विंड टर्बाइन्स, हाई-टेक और मिलिट्री इक्विपमेंट के लिए जरूरी हैं। चीन इन मिनरल्स पर करीब-करीब मोनोपॉली रखता है, और अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। ग्रीनलैंड इनका अल्टरनेटिव सोर्स बन सकता है। इसके अलावा आयरन, जिंक, यूरेनियम, ऑयल और गैस के बड़े रिजर्व हैं। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड पर पूरा कंट्रोल होने से अमेरिका आर्कटिक में डॉमिनेंट हो जाएगा। ट्रंप ने खरीदने की बात की है, लेकिन मिलिट्री फोर्स को भी रूल आउट नहीं किया। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं, कह रहे हैं कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है” और ऐसा करना NATO का अंत होगा। यह इंटरेस्ट नया नहीं है – अमेरिका ने 1946 में भी ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन अब ट्रंप इसे ज्यादा आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। Post navigation Tariff Decision Day : अगर टैरिफ पर आया ये फैसला तो पलट जाएगा सारा खेल Operation Sindoor : पाक के फिसड्डी फाइटर जेट की सऊदी से डील